भारतीय छात्र अब यूके और कनाडा के बजाय जर्मनी को ज्यादा तवज्जो देने लगे हैं। इसकी वजह उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आए हालिया बदलावों को माना जा रहा है।
जर्मनी के संघीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार, जर्मन विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों के एनरोलमेंट में पिछले पांच वर्षों में 146 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जर्मनी में पढ़ाई के लिए आने वाले अंतर्राष्ट्रीय छात्रों में इस साल भारत अग्रणी देश बन गया है। भारत के लगभग 42,600 छात्र वहां पढ़ाई कर रहे हैं, जो कुल विदेशी छात्रों का 12 प्रतिशत हैं।
लर्निंग प्लेटफॉर्म अपग्रेड के एक हालिया सर्वेक्षण से खुलासा हुआ है कि उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए कनाडा में भारतीय छात्रों की रुचि लगातार गिरती जा रही है। सर्वे में केवल 9.3 प्रतिशत छात्रों ने कनाडा में जाकर पढ़ाई को अपनी प्राथमिकता बताया। यह पिछले साल की तुलना में 8.55 प्रतिशत कम है। इसके उलट, 32.6 प्रतिशत छात्रों ने जर्मनी में उच्च शिक्षा की इच्छा जताई जो पिछले सर्वे से 19.4 प्रतिशत अधिक है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि कनाडा को लेकर भारतीय छात्रों की रुचि में कमी की प्रमुख वजहों में वहां जीवन यापन की बढ़ती लागत, अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए कम अनुकूल नीतियां और कनाडा एवं भारत के बीच बढ़ते राजनयिक तनाव जैसे कारण जिम्मेदार हैं। दूसरी तरफ, जर्मनी में मजबूत वैज्ञानिक कार्यक्रमों और अध्ययन के बाद के रोजगार के अनुकूल अवसरों की वजह से वहां की लोकप्रियता बढ़ रही है।
जर्मनी की पोस्ट स्टडी वर्क वीजा नीति ने उसे छात्रों की पसंद बनाने में अहम भूमिका निभाई है। जर्मनी में पढ़ाई पूरी करने पर छात्र 18 महीने के विस्तारित जॉब सीकिंग वीजा के पात्र बन जाते हैं। इसे आमतौर पर पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा के रूप में जाना जाता है। इन 18 महीनों के दौरान छात्रों को पढ़ाई के साथ रोजगार ढूंढने और आर्थिक समृद्धि के लिए नौकरी करने की आजादी मिलती है।
अध्ययन के बाद वर्क वीजा पाने के लिए सलाह दी जाती है कि वे छात्र वीजा की अवधि खत्म होने से पहले ही आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दें। हो सके तो अंतिम सेमेस्टर में ही आवेदन कर दें क्योंकि फाइनल एग्जाम के नतीजे आने के तुरंत बाद 18 महीने के वर्क वीजा की अवधि शुरू हो जाती है। इस प्रक्रियात्मक पहलू की जानकारी लेकर और आगे की योजना बनाकर छात्र जर्मनी में पढ़ाई करने के बाद आसानी से नौकरी हासिल करके पेशेवर बन सकते हैं।
इस वैश्विक रुझान के बीच यूके के विश्वविद्यालयों व कॉलेजों की एडमिशन सर्विस (यूसीएएस) पर गौर करें तो अलग ही रुझान देखने को मिलता है। हालांकि स्नातक कोर्सों में दाखिला लेने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों के आवेदनों में 0.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जो कि यूके को लेकर लगातार बनी हुई वैश्विक रुचि का संकेत देती है। लेकिन ब्रिटिश कॉलेजों में उच्च शिक्षा पाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में 4 प्रतिशत की गिरावट आई है। यह दिखाता है कि भारतीय छात्रों का यूके से मोहभंग जर्मनी के लिए फायदे का सौदा साबित हो रहा है।
यूसीएएस डेटा से वैश्विक स्तर पर एसटीईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग व गणित) कोर्सों की निरंतर मांग के बारे में झलक मिलती है। 2023 के बाद से इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी कोर्स करने वालों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। इसमें सबसे ज्यादा गणितीय विज्ञान और कंप्यूटिंग में 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
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