यह पांडुलिपि साल 2020 में यूनिवर्सिटी के अभिलेखागार में मिली थी। इसके बाद इसके लंबे समय तक संरक्षण और देखभाल का काम किया गया।

भारत और स्कॉटलैंड के विश्वविद्यालय गुरु ग्रंथ साहिब की 300 साल पुरानी पांडुलिपि के दर्शन की सुविधा देने पर चर्चा कर रहे हैं।
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