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अडानी पर आरोप निजी कंपनियों और अमेरिका के बीच कानूनी मुद्दा, भारत सरकार का बयान

अडानी समूह के अध्यक्ष और दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक अडानी के खिलाफ अभियोग लगाने पर भारत सरकार की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया है।

अडानी ग्रुप / रॉयटर्स/ अमित दवे

अमेरिका में भारत के दिग्गज अडानी ग्रुप पर रिश्तखोरी के आरोपों पर भारतीय विदेश मंत्रालय का बयान आया है। भारत ने कहा कि अरबपति गौतम अडानी के खिलाफ रिश्वतखोरी का आरोप निजी कंपनियों और अमेरिकी न्याय विभाग के बीच का कानूनी मुद्दा है और इस मामले में नई दिल्ली को वाशिंगटन से कोई अनुरोध नहीं मिला है।

यह टिप्पणी, भारतीय समूह अडानी समूह के अध्यक्ष और दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक अडानी के खिलाफ अभियोग लगाने पर भारत सरकार की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया है।

बता दें कि अमेरिकी अधिकारियों ने 62 वर्षीय अडानी, उनके भतीजे और कार्यकारी निदेशक सागर अडानी और अडानी ग्रीन के प्रबंध निदेशक विनीत एस जैन पर भारतीय सौर ऊर्जा आपूर्ति अनुबंध हासिल करने के लिए 265 मिलियन डॉलर की रिश्वत देने की योजना का हिस्सा होने और वहां धन जुटाने के दौरान अमेरिकी निवेशकों को गुमराह करने का आरोप लगाया है।

बंदरगाहों से लेकर बिजली तक का कारोबार करने वाली इस कंपनी ने इन आरोपों को "निराधार" बताते हुए इनकार किया तथा "सभी संभव कानूनी उपाय" अपनाने की बात कही है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने क्या कहा
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में संवाददाताओं से कहा, "यह निजी फर्मों और व्यक्तियों तथा अमेरिकी न्याय विभाग से जुड़ा कानूनी मामला है।" "ऐसे मामलों में स्थापित प्रक्रियाएं और कानूनी रास्ते हैं, जिनका हमें विश्वास है कि पालन किया जाएगा।" जायसवाल ने कहा कि भारत सरकार को अभियोग के बारे में पहले से सूचित नहीं किया गया था और वह इस समय "बातचीत" का हिस्सा नहीं है।

उन्होंने कहा कि किसी विदेशी सरकार द्वारा समन या गिरफ्तारी वारंट की तामील के लिए किया गया कोई भी अनुरोध पारस्परिक कानूनी सहायता का हिस्सा है और भारत को इस मामले में अमेरिकी पक्ष से कोई अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि "ऐसे अनुरोधों की योग्यता के आधार पर जांच की जाती है।"

हालांकि सरकार ने अभी तक अभियोग पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन भारत में सत्ताधारी पार्टी भाजपा ने कहा है कि उसके पास अडानी का बचाव करने का कोई कारण नहीं है और कानून अपना काम करेगा।

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