अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रम्प की जीत के बाद देश भर में अश्वेत अमेरिकियों को नस्लवादी मैसेज भेजे जा रहे हैं। अमेरिकी अधिकार समूह NAACP समेत कई संगठनों ने इसकी निंदा की है। एफबीआई ने भी इस मामले की जानकारी होने की पुष्टि की है।
NAACP ने एक बयान में कहा कि उत्तरी कैरोलिना, वर्जीनिया, अलबामा और पेंसिल्वेनिया सहित राज्यों में अश्वेत लोगों को इस तरह के मैसेज मिलने की सूचना मिली है। ये मैसेज कहां से भेजे रहे हैं, इसका पता नहीं चला है।
नागरिक अधिकार समूह के प्रमुख डेरिक जॉनसन ने कहा कि नफरत को प्रोत्साहित करने वाले राष्ट्रपति को चुनने की दुर्भाग्यपूर्ण वास्तविकता अब हमारे सामने सामने आ रही है। हम इससे मुंह नहीं चुरा सकते। दक्षिणपंथियों में लोकप्रिय ट्रम्प के कई समर्थक नस्लवादी बयानबाजी करते रहे हैं। हालांकि ट्रम्प ऐसे बयानों से खुद को अलग करते रहे हैं।
एफबीआई ने माना कि उसे लिखित नस्लवादी संदेशों के बारे में जानकारी है लेकिन यह नहीं बताया कि उसने इस मामले में जांच शुरू की है या नहीं। अमेरिकी मीडिया की खबरें बताती हैं कि कई राज्यों में अश्वेत छात्रों को आपत्तिजनक संदेश मिले थे। इनमें से कुछ तो कथित तौर पर ट्रम्प समर्थकों की तरफ से भेजे गए थे।
प्रमुख अधिकार समूह सदर्न पॉवर्टी लॉ सेंटर ने भी इस तरह के संदेशों की निंदा की है। समूह की प्रमुख मार्गरेट हुआंग ने कहा कि अलबामा स्टेट यूनिवर्सिटी और अलबामा विश्वविद्यालय के छात्रों समेत अश्वेत युवाओं को भेजे गए ये संदेश नफरत और नस्लवाद का सार्वजनिक प्रदर्शन है और हमारे नागरिक अधिकारों का मजाक उड़ाता है।
एफबीआई के आंकड़े बताते हैं कि साल 2023 में अमेरिका में कम से कम 11,447 घृणा अपराध रिपोर्ट हुए थे। इनमें से आधे से अधिक जातीयता से प्रेरित थे। 2020 के बाद हुए घृणा अपराधों में कम से कम 30.3 प्रतिशत में अश्वेत अमेरिकियों को टारगेट किया गया था।
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