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मीडिया के सामने संकटकाल; बचने के लिए क्या करें, EMS ब्रीफिंग में मंथन

जोएल साइमन ने पत्रकारों और मीडिया संस्थानों संगठनों के सामने मौजूद खतरों की चर्चा की और इससे निपटने के तरीके भी सुझाए।

ट्रंप की नई सरकार में कई न्यूजरूम अपनी आजादी बनाए रखने को लेकर परेशान हैं। / representative image : pexels

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एक अहम फैसले में कहा है कि कौन से मीडिया संस्थान राष्ट्रपति ट्रंप को करीब से कवर कर सकते हैं और कौन से नहीं, ये व्हाइट हाउस के अधिकारी तय करेंगे। इस इस फैसले के प्रेस की आजादी पर असर को लेकर एथनिक न्यूज मीडिया सर्विसेज की ब्रीफिंग में वक्ताओं ने चर्चा की। 

ट्रंप की नई सरकार में कई न्यूजरूम अपनी आजादी बनाए रखने को लेकर परेशान हैं। बे एरिया के रेडियो स्टेशन केसीबीएस को एफसीसी की जांच का सामना करना पड़ रहा है। उसने सैन जोस में आईसीई छापामारी की रिपोर्टिंग की थी। रेडियो स्टेशन को डर है कि उसका लाइसेंस छीना जा सकता है। 

क्रैग न्यूमार्क ग्रेजुएट स्कूल ऑफ जर्नलिज्म में जर्नलिज्म प्रोटेक्शन इनिशिएटिव के फाउंडर जोएल साइमन ने बताया कि पब्लिक इंट्रेस्ट डॉक्ट्राइन के तहत एफसीसी को रेडियो और टीवी जैसे मीडिया को रेगुलेट करने का अधिकार है। ये अधिकार उसे तब से मिला हुआ है, जब एयर वेब्स की कमी थी और सुप्रीम कोर्ट ने प्रिंट, ऑनलाइन या डिजिटल मीडिया से अलग प्रसारण मीडिया को रेगुलेट करने की एफसीसी को लिमिटेड छूट दी थी। 

साइमन ने पत्रकारों और मीडिया संस्थानों संगठनों के सामने मौजूद खतरों की चर्चा की और इससे निपटने के तरीके भी सुझाए। उन्होंने कहा कि हमें मीडिया की भूमिका को लेकर अलग तरह से सोचने की जरूरत है। हम आक्रामक नहीं हैं, हम नैरेटिव बदलने की लड़ाई लड़ रहे हैं। हम अपने अधिकारों को बचाने के लिए लड़ रहे हैं। ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने से पहले ही कई बड़े मीडिया संस्थानों के खिलाफ केस कर दिए थे। 

साइमन ने कहा कि एक सेफ्टी समिट में न्यूजरूम, एडवोकेसी और लीगल कम्युनिटी के लोगों ने "पत्रकारों और पत्रकारिता के लिए खतरे" विषय पर चर्चा की थी। इसमें स्वतंत्र पत्रकारिता पर कानूनी, रेगुलेटरी और सिस्टमैटिक खतरों और उसके संभावित समाधानों पर बात की गई। 

साइमन ने कहा कि हम रेगुलेटरी खतरे के शुरुआती दौर में हैं। ऐसे जांच पड़ताल भी डराने वाली हो सकती है क्योंकि प्रोसेस भी एक तरह का पनिशमेंट है। उन्होंने सुझाव दिया कि मीडिया घरानों और पत्रकारों को अपने बिजनेस को टैक्स, एम्प्लॉयमेंट और लेबर रिकॉर्ड्स के मामले में फूलप्रूफ बनाना चाहिए।  

न्यूजरूम के साथियों को जागरुक बनाना चाहिए। पत्रकारों को अपने अधिकारों के बारे में जानकारी होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, इमिग्रेशन एनफोर्समेंट पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को अपने इमिग्रेशन स्टेटस का ध्यान रखना चाहिए।

साइबस आर. वेंस सेंटर फॉर इंटरनेशनल जस्टिस के लॉयर्स फॉर रिपोर्टर्स के सीनियर स्टाफ अटॉर्नी जैक प्रेस ने सलाह दी कि मीडिया के लोग खुद को और अपने न्यूजरूम को बचाने के लिए यूनिफॉर्म पॉलिसीज और प्रैक्टिसेज लागू करें। ये डिजिटल सिक्योरिटी, किफायती मीडिया लॉ इंश्योरेंस या मीडिया लायबिलिटी इंश्योरेंस से जुड़ी हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे समय जब रिपोर्टर के नोट्स जैसी जानकारियां मांगी जा रही हों जिन्हें बताने की आमतौर पर छूट मिली होती है, तब न्यूजरूम को एक्शन प्लान के साथ तैयार रहना चाहिए। उन्हें अभी से इसके बारे में सोचना शुरू कर देना चाहिए।


 

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