जर्मनी ने कुशल भारतीय पेशेवरों को आवंटित किए जाने वाले वीजा की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी का ऐलान किया है। यह घोषणा जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्कोल्ज की नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात के दौरान की गई।
2023 से तीसरी बार भारत यात्रा पर आए स्कोल्ज ने कहा कि उनका प्रशासन कुशल भारतीय श्रमिकों को दिए जाने वाले वीजा की सालाना संख्या को 20,000 से बढ़ाकर 90,000 करने पर सहमत हो गया है। इसका संदेश यह है कि जर्मनी ने कुशल श्रमिकों के लिए अपने दरवाजे खुले रखे हैं।
पीएम मोदी ने इस समझौते को दोनों देशों के लिए आर्थिक वरदान करार दिया। उन्होंने कहा कि भारत की गतिशीलता और जर्मनी का सटीकता का मेल होता है, जब जर्मनी की इंजीनियरिंग और भारत का इनोवेशन एकसाथ आता है... तब हिंद-प्रशांत और पूरी दुनिया के लिए एक बेहतर भविष्य की उम्मीद गहरी हो जाती है।
जर्मनी ने वीजा आवेदन प्रक्रिया में नौकरशाही का दखल कम करने और भारतीय पेशेवरों की योग्यताओं की मान्यता में सुधार का भी वादा किया है। भारत और जर्मनी ने दो साल पहले पेशेवरों और छात्रों के आवागमन सुविधा के लिए प्रवासन समझौते पर हस्ताक्षर भी किए थे।
स्कोल्ज इससे पहले फरवरी 2023 में भारत की राजकीय यात्रा पर आए थे। पिछले साल के आखिर में नई दिल्ली में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन में भी वह शामिल हुए थे। इसके बाद अब वह एक साल के अंदर तीसरी बार भारत यात्रा पर आए हैं।
दुनिया की तीसरी और पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं के बीच मुलाकात के बाद कैबिनेट स्तर के मंत्रियों की वार्ता भी हुई। स्कोल्ज ने कहा कि हम रक्षा पर सहयोग को और गहरा बनाना चाहते हैं और अपनी सेनाओं को करीब लाने पर सहमत हैं। हमारा संदेश स्पष्ट है कि हमें ज्यादा से ज्यादा सहयोग की जरूरत है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने हाल ही में कहा था कि दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में साझेदारी और गहरी हुई है।
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