भारतीय विदेश मंत्रालय के आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि पिछले पांच वर्षों में विदेश में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के खिलाफ हिंसा की 91 घटनाएं हुई हैं। इनमें 30 छात्रों की मौत हो चुकी है। ये घटनाएं 12 देशों में दर्ज की गई हैं।
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने संसद में यह जानकारी देते हुए बताया कि कनाडा और अमेरिका सबसे ज्यादा घातक घटनाएं हुई हैं। कनाडा में छात्रों पर 27 हमले हुए हैं और 16 युवाओं को जान गंवानी पड़ी है। उसके बाद सबसे ज्यादा अमेरिका में 9 हमले हुए, जिनमें सभी की मौतें हो गईं।
मंत्री ने आगे बताया कि ब्रिटेन में 12 भारतीय युवाओं पर हमले हुए, जिनमें एक की मौत हो गई। रूस में भारतीय छात्रों पर 15 हमले हुए, हालांकि किसी की मौत नहीं हुई। इसके अलावा जर्मनी में भी 11 भारतीय स्टूडेंट्स पर हमले किए गए जिनमें से एक को बचाया नहीं जा सका।
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केंद्रीय मंत्री ने भरोसा दिलाया कि विदेश में रह रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमारे दूतावास इस तरह की हर घटना पर तुरंत कार्रवाई करते हैं और मामले को संबंधित देश की सरकार के यहां उच्चतम स्तर तक उठाते हैं।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने अपने छात्रों की मदद के लिए कई सुविधाएं शुरू की हैं। 2015 में शुरु किए गए MADAD पोर्टल पर छात्रों को ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने, ट्रैक करने की सुविधा मिलती है।
विदेश में संकट में फंसे छात्रों को कानूनी मदद, मेडिकल सहायता, अस्थायी निवास और शव वापसी जैसी सहायता प्रदान करने के लिए भारतीय समुदाय कल्याण कोष (ICWF) की स्थापना की गई है। इसके अलावा सभी दूतावासों में इमरजेंसी में संपर्क के लिए चौबीस घंटे सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं।
विदेश मंत्रालय ने सभी छात्रों से मदद पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराने और नजदीकी भारतीय दूतावास का फोन नंबर सेव करके रखने की अपील की है। ट्विटर पर @meaMadad के जरिए भी सहायता मांगी जा सकती है।
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