वाशिंगटन डीसी के नेशनल म्यूजियम ऑफ एशियन आर्ट में 30 मार्च को 'डिलाइटिंग कृष्णा कम्युनिटी डे' धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान कला प्रेमी, स्कॉलर्स और भक्तों की भारी भीड़ जमा थी। ये भारतीय कला और भक्ति परंपराओं का एक जबरदस्त सेलिब्रेशन था। म्यूजियम की पिछवाई प्रदर्शनी के इर्द-गिर्द घूमता ये इवेंट, गाइडेड टूर्स, एक्सपर्ट डिस्कशन्स और 'हवेली संगीत'- कृष्ण के घर का सेमी-क्लासिकल भक्ति संगीत, के लाइव परफॉर्मेंस से भरा हुआ था।
म्यूजियम की कई गैलरियों में ये इवेंट चला। क्यूरेटर्स, कंजर्वेटर्स और कम्युनिटी मेंबर्स ने पिछवाई आर्ट के अलग-अलग पहलुओं और हिंदू धर्म के पुष्टिमार्ग संप्रदाय से इसके गहरे कनेक्शन पर जानकारी दी। प्रोग्राम की शुरुआत गाइडेड स्पॉटलाइट टूर्स से हुई। विजिटर्स ने 'वल्लभाचार्य का वंश', 'कृष्ण के लिए लालसा', 'कुंज एकादशी (होली)' और 'गोपाष्टमी' जैसे थीम्स को एक्सप्लोर किया। एलन रिचर्डसन, जेनिफर जियाकाई, हिलेरी लैंगबर्ग और टियरनी ब्राउन जैसे एक्सपर्ट्स ने चर्चाएं कीं और प्रदर्शित कलाकृतियों पर ऐतिहासिक और तकनीकी नजरिया पेश किया।
इस दिन की सबसे खास बात रही मेयर ऑडिटोरियम में हुई हवेली संगीत। ये बेहद दुर्लभ संगीत परंपरा, पुष्टिमार्ग मंदिरों की भक्ति परंपराओं से गहराई से जुड़ी हुई है। इसे अमेरिका भर के संगीतकारों ने पेश किया। क्लासिकल राग और लोक धुनों का संगम से बनी इस शैली को 16वीं सदी में आठ सम्मानित कवियों ने साहित्यिक हिंदी (ब्रज भाषा) में लिखी थी।
न्यू जर्सी के संगीतकार शालीन सुखिया ने इस अनुभव को याद करते हुए प्रदर्शनी के प्रति अपना प्यार जाहिर किया। उन्होंने कहा, 'आज हमें स्मिथसोनियन के नेशनल म्यूजियम ऑफ एशियन आर्ट में पिछवाई प्रदर्शनी के हिस्से के तौर पर हवेली संगीत परफॉर्म करने का बड़ा ही अच्छा मौका मिला। पिछवाई बेहद खूबसूरत और सदियों पुरानी चीज है। इसमें नाथद्वारा से ही कई पेंटिंग्स हैं। रास लीला से लेकर गोपाष्टमी तक, हाथ से बनी इन बारीक पेंटिंग्स को देखना वाकई असाधारण रहा।'
साथी संगीतकार अर्जुन तलाती ने भी इसी तरह की भावनाएं व्यक्त कीं और इस आयोजन के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, 'स्मिथसोनियन ने इस प्रदर्शनी को एक बेहतरीन तरीके से तैयार किया है। अमेरिका में एक गैलरी में प्रभु श्रीनाथजी की उपस्थिति देखना वैष्णवों और व्यापक समुदाय के लिए एक अद्भुत अवसर है। माहौल बहुत ही शानदार था।'
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