भारत सरकार अवैध प्रवास और फर्जी भर्ती गिरोहों पर सख्त कार्रवाई कर रही है और इसी क्रम में अमेरिका के साथ डिपोर्टेशन (निष्कासन) मामलों में सक्रिय रूप से समन्वय कर रही है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने संसद में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जनवरी 2025 से अब तक अमेरिका ने 682 भारतीय नागरिकों को भारत वापस भेजा है। इनमें से अधिकतर लोग अमेरिका की सीमा पर अवैध रूप से घुसने की कोशिश करते समय पकड़े गए थे। भारत सरकार, इन नागरिकों की पहचान सुनिश्चित करने के बाद ही उन्हें वापस स्वीकार करती है।
विदेश मंत्री ने कहा कि सरकार अवैध तरीकों से विदेश जाने वाले भारतीयों की सुरक्षा और भलाई को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। अमेरिका के साथ लगातार बातचीत के ज़रिए छात्रों, पेशेवरों और पर्यटकों के लिए वैध और सुरक्षित रास्ते सुनिश्चित करने पर बल दिया जा रहा है। हालांकि, अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे भारतीयों की सटीक संख्या का पता लगाना मुश्किल है, क्योंकि अमेरिका जैसे देश आमतौर पर तब तक जानकारी साझा नहीं करते जब तक कोई व्यक्ति डिपोर्टेशन की प्रक्रिया में न हो।
वहीं, 2024 के अनुमानों के अनुसार, अमेरिका में कानूनी रूप से रह रहे प्रवासी भारतीयों (NRI) की संख्या लगभग 20,77,158 है। हालांकि, उनके वीज़ा की श्रेणियों का स्पष्ट विवरण सरकार के पास नहीं है क्योंकि यह आंकड़े समय के साथ बदलते रहते हैं। देश के भीतर अवैध भर्ती एजेंटों की गतिविधियों को लेकर भी सरकार सजग है। हरियाणा सहित कई राज्यों से फर्जी एजेंटों द्वारा धोखाधड़ी की शिकायतें मिली हैं। डिपोर्ट होकर लौटे लोगों के बयान के आधार पर कई मामलों में केस दर्ज हुए हैं और जांच जारी है।
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सरकार eMigrate पोर्टल, सोशल मीडिया और जागरूकता अभियानों के माध्यम से नागरिकों को ऐसे गिरोहों से सावधान कर रही है। फरवरी 2025 तक, देशभर में 3,281 अवैध एजेंटों की पहचान की जा चुकी है। राज्यों के साथ समन्वय कर पुलिस और एजेंसियों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि साइबर ठगी और फर्जीवाड़े को रोका जा सके।
हालांकि, मंत्री ने स्पष्ट किया कि फिलहाल इस मुद्दे पर कोई विशेष समिति गठित नहीं की गई है और न ही ऐसी कोई योजना विचाराधीन है। सरकार मौजूदा कानूनी ढांचे और एजेंसियों के सहयोग से ही अवैध प्रवास पर नियंत्रण करने में जुटी है। मंत्री ने यह भी कहा कि अमेरिका से हुई हालिया डिपोर्टेशन की घटनाएं भारत को मिलने वाले कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह (रेमिटेंस) पर कोई बड़ा असर नहीं डालेंगी।
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