बांग्लादेश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर भारत ने कड़ी चिंता व्यक्त की है। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में ऐसे 2400 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। संसद में पूछे गए सवाल के जवाब में विदेश राज्य मंत्री किर्ती वर्धन सिंह ने बताया कि भारत सरकार ने इस मुद्दे को कई मौकों पर बांग्लादेश सरकार के समक्ष उठाया है।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बढ़ा हमला
सिंह के अनुसार, 5 अगस्त 2024 से 23 मार्च 2025 के बीच 2400 से अधिक अल्पसंख्यक विरोधी घटनाएं दर्ज की गई हैं। यह संख्या पहले की रिपोर्टों से काफी अधिक है। दिसंबर 2024 में बांग्लादेश सरकार ने 88 मामलों में 70 लोगों की गिरफ्तारी की घोषणा की थी। हालांकि, जनवरी 2025 में हुई पुलिस जांच में यह संख्या 1,254 मामलों तक पहुंच गई, जिससे हालात की गंभीरता उजागर हुई।
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भारत की बांग्लादेश को सख्त चेतावनी
भारत ने बांग्लादेश से गहन जांच और दोषियों को सजा देने की मांग की है। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि इन हमलों को "राजनीतिक कारणों" का बहाना देकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
विदेश राज्य मंत्री ने कहा, "हमें उम्मीद है कि बांग्लादेश सरकार इन घटनाओं की गहराई से जांच करेगी और हत्याओं, आगजनी और हिंसा में शामिल सभी दोषियों को बिना किसी राजनीतिक बहाने के कठोर सजा देगी।"
भारत-बांग्लादेश कूटनीतिक बैठक
इस मुद्दे पर चर्चा 16 फरवरी 2025 को भारत के विदेश मंत्री और बांग्लादेश के विदेश सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन के बीच हुई थी। भारत ने बांग्लादेश को यह स्पष्ट संदेश दिया कि देश के हर नागरिक की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की होती है और अल्पसंख्यकों की रक्षा सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
भारत और बांग्लादेश के बीच बढ़ते कूटनीतिक दबाव के बीच यह मुद्दा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तूल पकड़ रहा है। बांग्लादेश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर भारत सरकार सतर्क बनी हुई है।
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