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27% टैरिफ के असर का भारत कर रहा है अध्ययन, ट्रेड डील पर जोर रहेगा

भारत के ट्रेड डिपार्टमेंट ने कहा कि वो अमेरिका की घोषणा के निहितार्थ का गहराई से स्टडी कर रहा है। साथ ही इंडियन इंडस्ट्री और एक्सपोर्टर्स से भी टैरिफ के असर पर राय ले रहा है।

13 फरवरी, 2025 को व्हाइट हाउस में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। / Reuters/Kevin Lamarque

भारत ने 3 अप्रैल को कहा कि वो अमेरिका द्वारा अपने आयात पर लगाए गए 27 फीसदी शुल्क के असर का अध्ययन कर रहा है। साथ ही इस साल ट्रेड डील के लिए आगे बढ़ेगा। ऐसा कहकर भारत ने राष्ट्रपति ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी से राहत न मिलने के बावजूद एक मिलनसार रवैया अपनाया है। नई दिल्ली का यह रिएक्शन ट्रंप द्वारा ड्रास्टिक टैरिफ की घोषणा के कुछ ही घंटे बाद आया, जिससे दुनियाभर में स्टॉक मार्केट और तेल की कीमतें गिर गईं। साथ ही ग्लोबल इकोनॉमी पर और दबाव बढ़ा।

ट्रंप ने कहा कि भारतीय प्रोडक्ट्स पर 26 फीसदी टैरिफ लगेगा। लेकिन व्हाइट हाउस के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में दर 27 फीसदी बताई गई। भारत के ट्रेड मिनिस्ट्री ने भी एग्जीक्यूटिव ऑर्डर का हवाला देते हुए दर 27 फीसदी बताई। बेसलाइन 10 फीसदी टैरिफ शनिवार से लागू होगा। बाकी बची ऊंची रेसिप्रोकल टैरिफ 9 अप्रैल से प्रभावी होगी।

भारत के ट्रेड डिपार्टमेंट ने कहा कि वो अमेरिका की घोषणा के निहितार्थ का गहराई से स्टडी कर रहा है। साथ ही इंडियन इंडस्ट्री और एक्सपोर्टर्स से भी टैरिफ के असर पर राय ले रहा है। बयान में कहा गया है कि डिपार्टमेंट, यूएस ट्रेड पॉलिसी में इस नए बदलाव से पैदा होने वाले मौकों का भी अध्ययन कर रहा है। इसमें ट्रंप और पीएम मोदी के बीच फरवरी में हुई बातचीत का भी जिक्र किया गया। जिसमें दोनों नेताओं ने 2025 तक ट्रेड डील के पहले फेज पर काम करने पर सहमति जताई थी।

बयान में कहा गया, 'चल रही बातचीत का फोकस दोनों देशों को ट्रेड, इन्वेस्टमेंट और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर बढ़ाने पर है। हम इन मुद्दों पर ट्रंप प्रशासन से संपर्क में हैं और आने वाले दिनों में इन्हें आगे बढ़ाने की उम्मीद है।' ट्रंप ने चीन पर पहले से घोषित 20 फीसदी टैक्स के अलावा 34 फीसदी और वियतनाम पर 46 फीसदी शुल्क लगाया है।  

भारत पर लगाई गई कम टैरिफ से इक्विटी मार्केट में शांति बनी रही। भारत के बेंचमार्क शेयर इंडेक्स निफ्टी 50 और बीएसई सेंसेक्स ट्रेडिंग के शुरुआती दौर में महज 0.3 फीसदी नीचे रहे। जबकि अन्य एशियाई मार्केट्स में 1.5 से 3 फीसदी तक की गिरावट देखी गई। रुपया भी शुरुआती कारोबार में 0.3 फीसदी गिरकर 85.75 प्रति डॉलर पर आ गया लेकिन बाद में 85.45 के स्तर पर वापस आ गया।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक, कम टैरिफ दरों की वजह से भारत को कई क्षेत्रों में प्राकृतिक प्रतिस्पर्धी बढ़त मिलेगी। करीब 14 अरब डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट और 9 अरब डॉलर के जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर यूएस टैरिफ से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।

हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने फार्मा एक्सपोर्ट को टैरिफ से छूट दी है। जिससे भारत की दवा कंपनियों को राहत मिली है। पिछले साल फार्मा का करीब 9 अरब डॉलर का निर्यात अमेरिका गया था, जो कुल निर्यात का एक तिहाई है। भारतीय दवा कंपनियों के शेयरों में गुरुवार को शुरुआती कारोबार में करीब 5 फीसदी की तेजी रही। जबकि ब्रॉडर मार्केट में गिरावट देखी गई।  

भारत के इंडस्ट्री बॉडीज एसोचैम और फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक, टैरिफ दरों में भारत का मध्य स्थान होने की वजह से भारत की एक्सपोर्ट कॉम्पेटिटिवनेस ज्यादा प्रभावित नहीं होगी।

अमेरिका का भारत के साथ 46 अरब डॉलर का ट्रेड डेफिसिट है। ये रेसिप्रोकल टैरिफ मोदी पर दबाव बनाएगा, जो खुद को ट्रंप के दोस्तों में गिनते हैं। उन्हें भारत को इस मुसीबत से निकालने के तरीके ढूंढने होंगे। 

पिछले हफ्ते रॉयटर्स की रिपोर्ट थी कि नई दिल्ली जेम्स-ज्वैलरी, फार्मा और ऑटो पार्ट्स जैसे सेक्टर्स पर असर कम करने के लिए 23 अरब डॉलर के अमेरिकी आयात पर टैरिफ कम करने को तैयार है।

मोदी सरकार ने हाई-एंड बाइक्स, बॉर्बन पर टैरिफ कम किया और अमेरिकी टेक दिग्गजों पर लगने वाले डिजिटल सर्विस टैक्स को भी हटा दिया है। रेसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा से पहले अमेरिका की औसत टैरिफ दर 3.3 फीसदी थी, जबकि भारत की 17 फीसदी थी।

फेडरेशन ऑफ इंडिया एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन के डायरेक्टर जनरल अजय साहाय ने कहा कि भारत पर लगाया गया रेसिप्रोकल टैरिफ वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों से कम है। इससे भारत के अपैरल और फुटवियर सेक्टर को मदद मिल सकती है।

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