भारत की शतरंज खिलाड़ी रमेशबाबू वैशाली ने न्यूयॉर्क के वॉल स्ट्रीट में आयोजित वर्ल्ड ब्लिट्ज चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है।
23 वर्षीय वैशाली सेमीफाइनल तक पहुंच गई थीं, लेकिन उन्हें जू वेनजुन के हाथों हार का सामना करना पड़ा। वेनजुन ने फाइनल में लेई टिंगजी को हराकर विमिंस ब्लिट्ज क्राउन हासिल किया।
वैशाली ने अपनी सफलता पर हैरानी जताते हुए कहा कि ईमानदारी से कहूं तो यह मेरे लिए अप्रत्याशित था। मुझे नहीं लगता कि मैं एक महान ब्लिट्ज खिलाड़ी हूं। कई और दमदार खिलाड़ी यहां मौजूद हैं। मैं भाग्यशाली थी जो मेडल जीतने में कामयाब रही।
क्लासिक चेस पसंद करने वाली वैशाली ने कहा कि रैपिड और ब्लिट्ज गेम मजेदार होते है। आपको हर दिन कई भावनाओं से उबरना होता है क्योंकि आपको मैच में आगे बढ़ना है।
वैशाली का एक प्रमुख मैच रूस की वेलेंटीना गुनिना के साथ हुआ। इसमें वैशाली ने सात सेकंड से भी कम समय में 23 चालें चलीं। शुरू में ड्रॉ खेलने और पिछ़डने के बावजूद वह जीत हासिल करने में सफल रहीं।
वेस्टब्रिज आनंद चेस अकादमी (डब्ल्यूएसीए) में वैशाली के मेंटर, पांच बार के विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि कांस्य पदक जीतने की वैशाली को बधाई। उन्होंने वाकई पावर-पैक्ड प्रदर्शन किया था। हम बहुत खुश हैं। साल 2024 को खत्म करने का इससे बेहतर क्या तरीका हो सकता था!'
गुजरा साल भारतीय शतरंज के लिए एक सफल वर्ष साबित हुआ। वैशाली से पहले कोनेरू हंपी ने विश्व रैपिड चैम्पियनशिप जीती थी। वैशाली और हंपी ने टोरंटो में प्रतिष्ठित कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में भी हिस्सा लिया था। वैशाली के कांस्य पदक ने उनकी उपलब्धियों में एक और सितारा जोड़ दिया है।
2023 में ग्रैंडमास्टर का खिताब जीतने वाली तीसरी भारतीय महिला बनने के बाद वैशाली ने शतरंज ओलंपियाड में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने में भी योगदान दिया था। इसमें उनके साथ दिव्या और वंतिका ने व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता
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