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ट्रम्प की नीतियों पर कृष्णमूर्ति का तीखा हमला, प्रवासियों की सुरक्षा पर जताई चिंता

इंडियन-अमेरिकन सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने ट्रम्प प्रशासन की नीतियों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने प्रवासियों, वेटरन्स, कटौती को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। बॉर्डर सिक्योरिटी के साथ-साथ इंसानियत भरे इमिग्रेशन सिस्टम की वकालत की।

सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने 19 मार्च को शॉम्बर्ग में एक टाउन हॉल मीटिंग की। / Courtesy Photo

इंडियन-अमेरिकन सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने 19 मार्च को शॉम्बर्ग में एक टाउन हॉल मीटिंग की। उन्होंने ट्रम्प प्रशासन के दौरान कमजोर प्रवासी आबादी की सुरक्षा के मुद्दे पर बात की। उन्होंने साफ कहा कि बॉर्डर सिक्योरिटी जरूरी है, लेकिन साथ ही इंसानियत से भरा हुआ इमिग्रेशन सिस्टम भी होना चाहिए।

कृष्णमूर्ति ने कहा कि अमेरिका की कामयाबी की नींव ही इमिग्रेशन है। हमारा इमिग्रेशन सिस्टम देश के लिए सबसे बड़ा हथियार है, यही हमारी ताकत है। उन्होंने कहा, 'आपके पूर्वजों ने, मेरे परिवार ने, हम सबने मिलकर इस देश को बनाया है। हमें इस सिस्टम को कमजोर करने की जगह और मजबूत करना है।' 

कृष्णमूर्ति ने कहा, 'मैं खुद एक प्रवासी हूं। कांग्रेस में कुछ ही ऐसे नैचुरलाइज्ड सिटीजन हैं। मेरा मानना है कि बॉर्डर को ठीक करना जरूरी है। इसमें कोई शक या सवाल नहीं है। लेकिन साथ ही हमारे लीगल इमिग्रेशन सिस्टम को भी दुरुस्त करना होगा।' उन्होंने आगे कहा, 'हमें क्रिमिनल्स को निकालना है, जिन पर डिपोर्टेशन ऑर्डर है उन्हें भी बाहर करना है। लेकिन स्कूलों, अस्पतालों और धर्मस्थलों में छापेमारी करना क्रिमिनल्स के पीछे पड़ने जैसा नहीं है। ये सिर्फ डर फैलाना है। ये गलत है।'

कृष्णमूर्ति ने ट्रम्प प्रशासन द्वारा प्रस्तावित भारी कटौतियों पर भी बात की। इस कार्यक्रम में खचाखच भीड़ थी। इससे साफ पता चला कि सांसद कृष्णमूर्ति उन नीतियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं जिन्हें वो कामकाजी परिवारों, प्रवासियों और वेटरन्स के लिए नुकसानदेह मानते हैं। 

कृष्णमूर्ति ने ट्रम्प के फेडरल फंडिंग फ्रीज, बर्थराइट सिटीजनशिप बैन और कई एजेंसियों में बड़ी संख्या में छंटनी के आदेशों का जोरदार तरीके से विरोध किया। उन्होंने कहा, 'मैं जहां तक हो सके सहयोग करूंगा, लेकिन जहां जरूरी होगा वहां विरोध भी करूंगा।' उन्होंने सोशल सेफ्टी नेट प्रोग्राम्स में 2 ट्रिलियन डॉलर की कटौती के प्रस्ताव पर गंभीर चिंता जताई।

कृष्णमूर्ति ने कहा, 'मैं खुद फूड स्टैम्प और पब्लिक हाउसिंग का बच्चा हूं। मेडिकेड से एक ट्रिलियन डॉलर और स्नैप (फूड स्टैम्प) से 300 बिलियन डॉलर की कटौती की संभावना बहुत गलत है।'

उन्होंने सीनियर्स पर पड़ने वाले असर, खासकर सोशल सिक्योरिटी को लेकर आगाह किया। उन्होंने जोर देकर कहा, 'ये कोई एन्टाइटलमेंट प्रोग्राम नहीं है, ये कमाई हुई रकम है।' उन्होंने सोशल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन में कर्मचारियों की कमी (7000 छंटनी की खबरें) से और मुश्किलें बढ़ने की बात कही। उन्होंने कहा कि अब लोग ऑनलाइन या फोन पर वेरिफिकेशन नहीं करा पाएंगे। उन्हें फील्ड ऑफिसेज में जाना होगा, लेकिन अब फील्ड ऑफिसेज भी कम हो रहे हैं।

कृष्णमूर्ति ने मुस्लिम-बहुल देशों को निशाना बनाने वाले ट्रम्प के ट्रैवल बैन के नए संस्करण की भी निंदा की। उन्होंने कहा, '2017 में अपने पहले हफ्ते में ही उन्होंने 'मुस्लिम बैन' लागू कर दिया था।' उन्होंने ओ'हेयर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए गए ग्रीन कार्ड होल्डर्स की मदद करने के अपने प्रयासों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अब राष्ट्रपति ट्रम्प उस बैन को फिर से लागू करना चाहते हैं। उन्होंने आगाह किया कि इस नीति को फिर से लागू करने से विजिटर वीजा और लंबित आवेदनों में बाधा आएगी।

वेटरन्स के मुद्दों पर जोर देते हुए कृष्णमूर्ति ने इलॉन मस्क की डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) पहल की आलोचना की। उनका दावा था कि इससे डिपार्टमेंट ऑफ वेटरन्स अफेयर्स (VA) में 80,000 कर्मचारियों की छंटनी होगी। उन्होंने कहा, 'मेरा भाई VA में डॉक्टर था। VA सर्विस-कनेक्टेड डिसेबिलिटीज से लेकर प्रोस्थेटिक रिप्लेसमेंट और ट्रॉमैटिक ब्रेन इंजरी के इलाज तक सबकुछ मुहैया कराता है। कई वेटरन्स हर हफ्ते इन सेवाओं पर निर्भर रहते हैं।'

कृष्णमूर्ति ने इस दावे को खारिज किया कि इन कटौतियों से सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा, 'VA के सेक्रेटरी डग कॉलिन्स का कहना है कि बेनिफिट्स में कोई कटौती नहीं होगी। लेकिन मुझे समझ नहीं आता कि जब VA से 80,000 लोग छंटनी के शिकार होंगे तो वेटरन्स कैसे असर से बचे रहेंगे।'

उन्होंने फेडरल गवर्नमेंट में काम करने वाले वेटरन्स पर पड़ने वाले असर की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा, 'ये सबसे बेहतरीन और होशियार कर्मचारी होते हैं। ये समय पर काम पर आते हैं, अपना काम करते हैं, इनकी ईमानदारी बुलंद होती है। कॉस्ट-कटिंग के नाम पर इन्हें क्यों निकाला जा रहा है?'

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