दुबई में आयोजित इंडियास्पोरा AI समिट में मेफील्ड फंड (Mayfield Fund) के मैनेजिंग डायरेक्टर नवीन चड्ढा ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के भविष्य पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने एआई को एक बाधा नहीं, बल्कि एक सहयोगी ताकत बताया जो इंसानों और मशीनों को मिलकर काम करने का एक अभूतपूर्व अवसर प्रदान कर सकती है।
"एरा ऑफ कॉलैबोरेटिव इंटेलिजेंस" विषय पर अपने संबोधन में नवीन चड्ढा ने कहा कि एआई से डरने या इसे रोकने की जरूरत नहीं है। यह एक ऐसा मौका है जो इंसानों को सुपरह्यूमन बना सकता है। एआई हमारी क्षमताओं को बढ़ाएगा, काम को आसान बनाएगा और ऐसे काम करने में मदद करेगा जो पहले नामुमकिन लगते थे।
उन्होंने कहा कि मैं एआई को सहयोगी बुद्धिमत्ता के रूप में देखता हूं। आने वाले समय में मशीनें और इंसान मिलकर काम करेंगे और एआई से इंसान सुपरह्यूमन बन सकते हैं। इसमें इंसानों की ताकत को 100 गुना बढ़ाने की क्षमता है। आज दुनिया में 20 मिलियन डेवलपर्स हैं, लेकिन एआई की मदद से यह संख्या 7 अरब तक पहुंच सकती है।
चड्ढा ने कहा कि ऑटोमेशन ने पहले ही फैक्ट्रियों, असेंबली लाइन्स और रोजमर्रा के कामकाज में क्रांति ला दी है जिससे काम करने की क्षमता बढ़ी है। एआई इसी कड़ी में अगला कदम है। उनका मानना है कि एआई ऐसे कामों को भी कर सकता है जो इंसान नहीं करना चाहते, या कर नहीं सकते, या जिनके लिए समय और टैलेंट की कमी होती है।
उन्होंने कहा कि मैं 70 के दशक में पैदा हुआ हूं और मैंने मशीन लैंग्वेज सीखी। पहले आपको कोई प्रोग्रामिंग सीखनी होती थी। फिर नई प्रोग्रामिंग और उसके बाद फिर से कोई नई प्रोग्रामिंग सीखनी पड़ती थी। लेकिन अब एआई को सिर्फ नेचुरल लैंग्वेज दो और वह आपका काम कर देगा।
चड्ढा ने कहा कि इंसानों को इस टेक्नोलॉजी से डरना नहीं चाहिए बल्कि इसे सही तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई एक टूल है, 100 गुना ताकतवर टूल। हमें इसे अपनाना चाहिए, इसे कंट्रोल करना चाहिए और तब हम ऐसे काम कर पाएंगे जो पहले मुमकिन नहीं थे।
हालांकि चड्ढा ने एआई के कुछ खतरों के बारे में भी आगाह किया। उद्यमियों से इसके नैतिक पहलुओं पर ध्यान देने को कहा। उन्होंने प्राइवेसी, इंसानियत और एआई गवर्नेंस को प्राथमिकता देने की बात कही और सरकारी नियमों को जरूरी बताया।
उन्होंने कहा कि हमें कुछ टेक्नोलॉजी पर सीमाएं लगानी होंगी। उद्यमियों को प्राइवेसी, इंसानियत और एआई गवर्नेंस का ध्यान रखना चाहिए और सरकारी नियमों को अपनाना चाहिए।
चड्ढा ने इसके अलावा अपने फंड द्वारा 500 से ज्यादा कंपनियों और 120 से अधिक आईपीओ में निवेश की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि सही प्रोजेक्ट चुनने में सिर्फ प्रोडक्ट या सर्विस नहीं बल्कि उसके पीछे के लोग मायने रखते हैं। उन्होंने कहा कि हम घोड़े पर नहीं, जॉकी पर दांव लगाते हैं।
चड्ढा ने माना कि तेजी से बदलते बाजार में टेक्नोलॉजी का भविष्य अनिश्चित है। बाजार में आगे क्या होगा, यह बताना अभी मुश्किल है, लेकिन जब आप सही लोगों के साथ काम करते हैं तो जादू जैसा काम हो सकता है। वे सही मौके को पकड़ने का तरीका ढूंढ लेते हैं।
बता दें कि इंडियास्पोरा और दुबई फ्यूचर फाउंडेशन की तरफ से इस प्रथम ग्लोबल एआई समिट का आयोजन दुबई के म्यूजियम ऑफ द फ्यूचर में किया गया। इसमें सिलिकॉन वैली, यूएई, भारत और अन्य देशों के वक्ताओं ने हिस्सा लिया और ऐतिहासिक तकनीकी क्रांति पर चर्चा की।
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