भारत-अमेरिका के प्रमुख उद्यमी और दानी सुनील वाधवानी ने न्यू इंडिया अब्रॉड से खास बातचीत में कहा कि भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकता है। अबू धाबी में आयोजित इंडियास्फोरा समिट फोरम फॉर गुड (IFG) में वाधवानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व में भारत की प्रगति और तकनीकी नवाचारों के महत्व पर जोर दिया।
वाधवानी ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी AI और तकनीकी विकास में विश्वास रखते हैं, और मुझे पूरा विश्वास है कि भारत इस क्षेत्र में वैश्विक नेता बन सकता है।"
समिट में 34 देशों के 600 से अधिक भारतीय समुदाय के सदस्य एकत्र हुए और वाधवानी ने भारतीय पेशेवरों के वैश्विक योगदान पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारतीय मूल के उद्यमी और दानकर्ता भारत में स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं। वाधवानी ने अपनी वाधवानी इंस्टीट्यूट ऑफ AI की पहल का भी उल्लेख किया, जिसमें मोबाइल फोन के जरिए तपेदिक का पता लगाने का टूल शामिल है। इसके अलावा, गुजरात में बच्चों के भाषा कौशल का आकलन करने वाली परियोजना भी चल रही है।
डॉ. आनंद देशपांडे का योगदान
पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के संस्थापक डॉ. आनंद देशपांडे ने इस समिट को एक अद्भुत अवसर बताया, जहां भारतीय प्रवासी एक साथ आकर विचार-विमर्श कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रवासी व्यवसाय, राजनीति और प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं और "अमृत काल" के दौरान भारत के विकास में उनकी भूमिका अहम होगी।
हिमांशु शाह का सुझाव
मारियस फार्मास्युटिकल्स के संस्थापक हिमांशु शाह ने भारत के विनिर्माण और नवाचार क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, "भारत को आत्मनिर्भर बनना होगा और सरकार को कौशल-आधारित शिक्षा और मेगा फैक्ट्री पर ध्यान देना चाहिए।" शाह ने भारत की चुनावी प्रणाली पर भी चिंता जताई और राज्य और केंद्र चुनावों के समकालिक होने की आवश्यकता बताई, ताकि शासन में सुधार हो सके।
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