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भारतीय-अमेरिकी इंजीनियर रमेश अग्रवाल को 2025 का मॉन्टगोमरी अवॉर्ड

जॉन जे. मॉन्टगोमरी पुरस्कार एयरोस्पेस क्षेत्र में उल्लेखनीय इनोवेशन और योगदान के लिए प्रदान किया जाता है।

रमेश अग्रवाल वाशिंगटन यूनिवर्सिटी सेंट लुइस में इंजीनियरिंग के विलियम पाम प्रोफेसर हैं। / Courtesy Image

अमेरिकन सोसाइटी ऑफ मैकेनिकल इंजीनियर्स (ASME) ने भारतीय मूल के अमेरिकी एयरोस्पेस इंजीनियर रमेश अग्रवाल को साल 2025 के जॉन जे. मॉन्टगोमरी अवॉर्ड से सम्मानित किया है। 

यह पुरस्कार एयरोस्पेस क्षेत्र में उल्लेखनीय इनोवेशन और योगदान के लिए प्रदान किया जाता है। मॉन्टगोमरी अवॉर्ड उन इंजीनियरों को सम्मानित करता है जिन्होंने प्रोपल्शन, मटीरियल्स, और फ्लाइट कंट्रोल जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। 

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रमेश अग्रवाल वाशिंगटन यूनिवर्सिटी सेंट लुइस में इंजीनियरिंग के विलियम पाम प्रोफेसर हैं। उन्हें यह पुरस्कार 5-7 मई 2025 को ह्यूस्टन में होने वाले एएसएमई स्ट्रक्चर्स, स्ट्रक्चरल डायनेमिक्स एंड मटेरियल्स (एसएसडीएम) सम्मेलन में प्रदान किया जाएगा। 

रमेश अग्रवाल ने शिक्षा और उद्योग जगत दोनों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनकी शोध उपलब्धियों में कम्प्यूटेशनल फ्लूइड डायनेमिक्स, कम्प्यूटेशनल मैग्नेटो हाइड्रो डायनेमिक्स, कम्प्यूटेशनल एयरो ऐकॉस्टिक्स और हाइपरसोनिक फ्लो जैसे क्षेत्र शामिल हैं। 

साल 2001 में वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में शामिल होने से पहले रमेश अग्रवाल ने 1994 से लेकर 1996 तक विचिटा स्टेट यूनिवर्सिटी में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के प्रेसिडेंट के रूप में सेवाएं दी थीं। 1996 से लेकर 2001 तक वह नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एविएशन रिसर्च के कार्यकारी निदेशक रहे। 

उन्होंने मैकडॉनेल डगलस रिसर्च लैब, नासा एम्स रिसर्च सेंटर और राव एंड असोसिएट्स जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं में भी कार्य किया है। एयरोस्पेस, ऊर्जा, एवं पर्यावरण इंजीनियरिंग क्षेत्र में उनके 600 से अधिक लेख छप चुके हैं। 

रमेश अग्रवाल ने चार किताबें भी लिखीं हैं। वह 20 से अधिक शैक्षणिक पत्रिकाओं के संपादकीय बोर्ड में शामिल हैं और 32 पेशेवर संगठनों के फेलो हैं।
 

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