यूके सरकार ने बैंक ऑफ इंग्लैंड की मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी में बाहरी सदस्य के रूप में अर्थशास्त्री स्वाति भिंगरा का कार्यकाल तीन साल के लिए बढ़ा दिया गया है। स्वाति भिंगरा लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अर्थशास्त्र की एसोसिएट प्रोफेसर हैं।
स्वाति भिंगरा को पहली बार अगस्त 2022 में एमपीसी की बाहरी सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया था। उनका पहला कार्यकाल 8 अगस्त 2025 को समाप्त होने वाला था, लेकिन अब इसे तीन साल और बढ़ा दिया गया है। उनका नया कार्यकाल अब 8 अगस्त 2028 तक होगा।
भिंगरा का शोध आर्थिक प्रदर्शन, व्यापार नीति और श्रम बाजारों पर केंद्रित है। वह एलएसई के सेंटर फॉर इकोनॉमिक परफॉर्मेंस से जुड़ी हुई हैं। उन्हें इकोनॉमिक एंड सोशल रिसर्च काउंसिल, यूरोपियन रिसर्च काउंसिल और यूके रिसर्च एंड इनोवेशन से फंडिंग मिल चुकी हुई है। 2019 में उन्हें ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स का रिसर्च एक्सीलेंस पीपल्स चॉइस अवार्ड भी मिल चुका है।
भिंगरा ने रिव्यू ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज की निदेशक के रूप में भी कार्य किया है। इसके अलावा वह यूके की ट्रेड मॉडलिंग रिव्यू एक्सपर्ट पैनल और एलएसई की इकोनॉमिक डिप्लोमेसी कमीशन की सदस्य भी रही हैं।
एमपीसी में रीअपॉइंटमेंट ऑटोमैटिक नहीं होती हैं और इन्हें पब्लिक अपॉइंटमेंट गवर्नेंस कोड के तहत व्यक्तिगत रूप से आंका जाता है। बाहरी सदस्यों की नियुक्ति का अंतिम निर्णय यूके के चांसलर द्वारा किया जाता है।
एमपीसी बैंक ऑफ इंग्लैंड का एक स्वतंत्र निकाय है जो यूके की मौद्रिक नीति तय करने में अहम भूमिका निभाता है। इसमें बैंक के गवर्नर, तीन डिप्टी गवर्नर, मुख्य अर्थशास्त्री और चार बाहरी सदस्य होते हैं। बाहरी सदस्यों को चांसलर द्वारा नियुक्त किया जाता है। वे अधिकतम दो बार तीन वर्षीय कार्यकाल में सेवाएं दे सकते हैं।
स्वाति भिंगरा की फिर से नियुक्ति को यूके की आर्थिक नीति में उनके योगदान और विशेषज्ञता की लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उनकी नियुक्ति से एमपीसी को वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और व्यापार नीतियों के संदर्भ में मजबूत निर्णय लेने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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