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'बिग फोर' में 40% गिरावट', भारतीय छात्रों का रुख जर्मनी-न्यूजीलैंड की ओर

विदेशों में उच्च शिक्षा के लिए जाने वाले भारतीय छात्रों के रुझान में बड़ा बदलाव आया है। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे पारंपरिक देशों में छात्रों की संख्या में भारी गिरावट आई है। दूसरी तरफ, जर्मनी और न्यूजीलैंड में छात्रों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है।

प्रतीकात्मक तस्वीर / Pexels

2024 में अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों की तादाद में 40% की भारी गिरावट आई है। ये काफी बड़ा बदलाव है। इन देशों में पढ़ाई करने वालों की दिलचस्पी कम होने की वजह कड़े इमीग्रेशन नियम, बढ़ती फीस और वीजा की अनिश्चितता है। 

उधर, जर्मनी और न्यूजीलैंड जैसे देशों में भारतीय छात्रों की संख्या में जबर्दस्त बढ़ोतरी हुई है। इन देशों में कम फीस, पढ़ाई के बाद काम करने के अच्छे मौके और वीजा-इमीग्रेशन का आसान सिस्टम भारतीय छात्रों को खूब लुभा रहा है। ये देश अब विदेश में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों के लिए बेहतरीन विकल्प बनते जा रहे हैं।

ICEF मॉनिटर की रिपोर्ट और भारतीय सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में विदेशों में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में पिछले साल के मुकाबले कुल 15% की कमी आई है। 'बिग फोर' देशों में सबसे अधिक गिरावट कनाडा में देखी गई, जहां भारतीय छात्रों की संख्या 2023 के 233,500 से घटकर 2024 में महज 137,600 रह गई। यह 41% की कमी है। ब्रिटेन और अमेरिका में भी 28% और 13% की भारी गिरावट आई। ऑस्ट्रेलिया में भी 12% की कमी देखी गई। कुल मिलाकर, इन देशों में 2024 में विदेशों में पढ़ने वाले 72% भारतीय छात्र थे, हालांकि इनका हिस्सा अब साफ तौर पर कम हो रहा है।

छात्रों की संख्या में कमी की कई वजहें हैं। इनमें बढ़ती ट्यूशन फीस और सख्त वीजा नियम सबसे अहम हैं। ICEF मॉनिटर के मुताबिक, भारतीय छात्र सिर्फ अच्छी पढ़ाई ही नहीं, बल्कि पढ़ाई के बाद काम करने के मौके और वहां बसने के रास्ते भी ढूंढते हैं। लेकिन अब पारंपरिक देशों में ये रास्ते कम होते जा रहे हैं। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से भारतीय छात्रों पर आर्थिक बोझ और बढ़ गया है, जिससे इन देशों में पढ़ाई और भी महंगी हो गई है।

'बिग फोर' देशों का रुतबा कम हो रहा है। वहीं, जर्मनी और न्यूजीलैंड में भारतीय छात्रों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। भारतीय सरकार के आंकड़ों के अनुसार, जर्मनी में भारतीय छात्रों की संख्या 2022 से 2024 के बीच 20,700 से बढ़कर 34,700 हो गई। यह 68% की बढ़ोतरी है। इस बढ़ोतरी की बड़ी वजह जर्मनी में बेहतरीन शिक्षा, कम फीस और पढ़ाई के बाद काम करने के ढेर सारे मौके हैं। 

न्यूजीलैंड में भी भारतीय छात्रों की संख्या में जबरदस्त उछाल आया है। 2022 से 2024 के बीच 1,600 से बढ़कर 7,300 छात्र हो गए। यह 354% की बढ़ोतरी है। ICEF मॉनिटर के मुताबिक, लचीले वीजा नियमों और सुरक्षित माहौल की वजह से न्यूजीलैंड अंग्रेजी बोलने वाले देशों में भारतीय छात्रों के लिए सबसे अधिक आकर्षक बन गया है। यहां की शिक्षा व्यवस्था बेहद अच्छी है और ग्रेजुएट्स के लिए वर्क वीजा मिलने की वजह से ये देश सिर्फ अच्छी पढ़ाई ही नहीं, बल्कि पढ़ाई के बाद काम की तलाश में भी छात्रों की पहली पसंद बन गया है।

 

 

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