अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प और व्हाइट हाउस ने बुधवार को भारत पर अमेरिकी उत्पादों के निर्यात को सीमित करने वाले उच्च और बोझिल टैरिफ लगाने का आरोप लगाया। कई सांसदों ने भी यही आरोप दोहराये।
ट्रम्प ने व्हाइट हाउस के रोज गार्डन से अपने टेलीविजन संबोधन में कई नए टैरिफ की घोषणा करते हुए कहा कि भारत बहुत, बहुत सख्त है। भारत के प्रधानमंत्री अभी-अभी गए हैं और वे मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं। लेकिन मैंने कहा कि आप मेरे दोस्त हैं लेकिन आप हमारे साथ सही व्यवहार नहीं कर रहे।
ट्रम्प ने भारत पर 26 प्रतिशत 'छूट वाले पारस्परिक टैरिफ' की घोषणा करते हुए कहा कि वे (भारत) हमसे 52 प्रतिशत शुल्क लेते हैं। आपको समझना होगा कि हम उनसे सालों और दशकों तक लगभग कुछ भी नहीं लिया।
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ट्रम्प ने बुधवार को घोषणा की कि वह सभी व्यापारिक साझेदारों पर 10 प्रतिशत न्यूनतम टैरिफ लगाएंगे और साथ ही दर्जनों अन्य देशों पर दोहरे अंकों का पारस्परिक टैरिफ लगाएंगे। पारस्परिक टैरिफ यूरोपीय संघ, चीन, यूनाइटेड किंगडम और भारत सहित लगभग 60 देशों पर लागू होंगे। कनाडा और मैक्सिको से आयात पर अभी भी 25 प्रतिशत टैरिफ लगेगा।
एक तथ्य पत्र में व्हाइट हाउस ने कहा कि भारत रसायन, दूरसंचार उत्पादों और चिकित्सा उपकरणों जैसे क्षेत्रों में अपने स्वयं के अनूठे बोझिल और/या दोहराव वाले परीक्षण और प्रमाणन आवश्यकताओं को लागू करता है जो अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत में अपने उत्पादों को बेचना मुश्किल या महंगा बनाते हैं। व्हाइट हाउस ने कहा कि यदि इन बाधाओं को हटा दिया जाता है तो अनुमान है कि अमेरिकी निर्यात में सालाना कम से कम 5.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर की वृद्धि होगी।
व्हाइट हाउस ने कहा कि देशों ने पीढ़ियों से अमेरिका का फ़ायदा उठाया है। अमेरिका पर उच्च दरों पर शुल्क लगाया है। उदाहरण के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका यात्री वाहन आयात (आंतरिक दहन इंजन के साथ) पर 2.5% शुल्क लगाता है जबकि यूरोपीय संघ (10%) और भारत (70%) उसी उत्पाद पर बहुत अधिक शुल्क लगाते हैं।
व्हाइट हाउस ने कहा कि भूसी में चावल के लिए अमेरिका 2.7% का शुल्क लगाता है जबकि भारत (80%), मलेशिया (40%), और तुर्की (31%) उच्च दरें लगाते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में सेब शुल्क-मुक्त आते हैं लेकिन तुर्की (60.3%) और भारत (50%) में ऐसा नहीं है।
ट्रम्प के लिबरेशन डे टैरिफ का जश्न मनाते हुए सीनेटर टॉमी ट्यूबरविले ने कहा कि वियतनाम अरबों पाउंड कैटफ़िश डंप कर रहा है और भारत हर साल अरबों पाउंड झींगा अमेरिकी बाजारों में डंप कर रहा है। इससे बाजार भर रहे हैं और अमेरिकी गुणवत्ता वाले घरेलू उत्पादों की कीमत कम हो रही है। यह विनाशकारी है। हमें अपने अमेरिकी उत्पादकों की रक्षा के लिए इन देशों पर पारस्परिक टैरिफ लगाने की ज़रूरत है।
सीनेटर रोजर मार्शल ने आरोप लगाया कि भारत में कृषि उत्पादों पर बहुत अधिक टैरिफ है। यूरोपीय संघ ने अधिकांश कृषि उत्पादों पर 50% टैरिफ लगाया है। भारत 50% से 100% लगाता है। वे गैर-टैरिफ बाधाओं का भी उपयोग करते हैं मगर हमारे पास अब एक ऐसे राष्ट्रपति हैं जो हमारे किसानों और पशुपालकों के लिए दीर्घकालिक समाधान के लिए लड़ रहे हैं न कि केवल अल्पकालिक लाभ के लिए।
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