अमेरिका द्वारा 10% से 50% तक के पारस्परिक टैरिफ लगाने के फैसले से वैश्विक व्यापार में हलचल मच गई है। भारत पर 27% टैरिफ लागू किया गया है, जिससे इंजीनियरिंग और ऑटो कंपोनेंट निर्यातकों को झटका लग सकता है, लेकिन कपड़ा और परिधान उद्योग को एक अवसर भी मिल सकता है। भारत का टैरिफ बोझ चीन (34%), वियतनाम (46%) और बांग्लादेश (37%) से कम होने के कारण प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है।
इंजीनियरिंग निर्यात पर असर
अमेरिका को भारत का इंजीनियरिंग निर्यात 17.27 अरब डॉलर का था, जो अब 4-5 अरब डॉलर तक घट सकता है। EEPC इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा के अनुसार, "27% टैरिफ और स्टील व एल्युमिनियम पर 25% अतिरिक्त शुल्क से दोहरी मार पड़ेगी।" ईसेन इंटरनेशनल के चेयरमैन रवि सहगल ने कहा, "यह अस्थायी झटका है, क्योंकि सभी एशियाई देश उच्च टैरिफ झेल रहे हैं।"
ऑटो पार्ट्स उद्योग पर असर
ACMA की प्रेसिडेंट श्रद्धा सूरी मारवाह ने कहा कि "भारत और अमेरिका के बीच मजबूत व्यापार संबंधों के चलते संतुलित समाधान निकलने की उम्मीद है।"
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कपड़ा उद्योग को राहत
भारत के 27% टैरिफ के बावजूद, चीन (34%), बांग्लादेश (37%) और वियतनाम (46%) पर अधिक टैरिफ लगने से भारत के लिए मौका बन सकता है।
AEPC के महासचिव मिथिलेश्वर ठाकुर ने कहा, "भारत को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है, लेकिन हमें दक्षता बढ़ाने की जरूरत होगी।"
भारत की रणनीति और सरकार का रुख
IIFT के प्रो. राम सिंह ने कहा, "सीफूड, मसाले, और स्मार्टफोन निर्यात को मुश्किल हो सकती है, लेकिन कपड़ा और इंजीनियरिंग क्षेत्रों को लाभ हो सकता है।" आनंद राठी ग्रुप के मुख्य अर्थशास्त्री सुजान हजरा के मुताबिक, "भारत का टैरिफ 26% प्रतिस्पर्धात्मक रूप से बेहतर है और लॉन्ग टर्म में इसका फायदा मिल सकता है।"
व्यापार वार्ता और भविष्य की रणनीति
भारत सरकार COMPACT फ्रेमवर्क के तहत अमेरिका से व्यापार वार्ता जारी रखेगी। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा, "भारत अपने व्यापारिक अवसरों का लाभ उठाने के लिए अमेरिका से बातचीत जारी रखेगा।"
आने वाले महीनों में अमेरिका के नए टैरिफ नीति का असली असर सामने आएगा। जहां कुछ उद्योगों को नुकसान होगा, वहीं कपड़ा और अन्य निर्यात क्षेत्रों को नया बाजार भी मिल सकता है।
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