कनाडा में टोरंटो के अखबार 'ग्लोब एंड मेल' ने एक खबर छापी है, जिसमें दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री मोदी को सिख अलगवावादी के खिलाफ चलाई जा रही अभियान की जानकारी थी। इसके बाद भारत ने विरोध जताते हुए कनाडा को खूब खरी-खोटी सुनाई और कहा कि दोनों देशों के पहले से ही खराब रिश्तों को और ज्यादा नुकसान हो सकता है।
मंगलवार को 'ग्लोब एंड मेल' अखबार ने रिपोर्ट की कि कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि मोदी को कनाडाई अलगाववादी निज्जर के खिलाफ चलाई जा रही अभियान की जानकारी थी। इस पर बुधवार देर रात भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा, 'कनाडा सरकार के सूत्रों के हवाले से अखबार में छपी ऐसी बेतुकी बातों को उतनी ही अवहेलना के साथ खारिज किया जाना चाहिए जितनी वो हकदार हैं।' मंत्रालय ने आगे कहा, 'इस तरह के अभियान से हमारे पहले से ही खराब रिश्ते और भी ज्यादा बिगड़ेंगे।'
अखबार ने एक अनाम कनाडाई अधिकारी के हवाले से कहा कि विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को भी इस बात की जानकारी थी। उस अनाम अधिकारी ने टोरंटो के अखबार को बताया, 'हमारा मानना है कि ये सोचना भी नामुमकिन है कि भारत के तीन बड़े राजनीतिक नेता इस टारगेटेड किलिंग के बारे में प्रधानमंत्री मोदी से बात किए बिना आगे बढ़ते।'
बता दें कि कनाडा ने पहले भारत पर बिना कोई सबूत पेश किए आरोप लगाया था कि उसने 2023 में वैंकूवर में 45 साल के अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या करवाई। निज्जर खालिस्तान मूवमेंट से जुड़ा हुआ था। कनाडा का कहना है कि भारत ने इस मूवमेंट से जुड़े और भी अलगववादियों को निशाना बनाया। 45 साल के निज्जर को मास्क पहने हुए हथियारबंद लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
भारत लगातार इन आरोपों को खारिज करता रहा है। इन आरोपों की वजह से दोनों देशों के रिश्ते बिलकुल खराब हो गए। पिछले महीने दोनों देशों ने एक-दूसरे के कई वरिष्ठ राजनयिकों को निकाल भी दिया था। इसके बाद कनाडा ने भारत के गृह मंत्री अमित शाह पर भी बिना कोई सबूत दिए आरोप लगा दिए। इस पर भारत ने साफ कर दिया था कि गृह मंत्री अमित शाह ने कनाडा में अलगाववादियों को निशाना बनाने की कोई साजिश नहीं रची थी। भारत ने ओटावा की इस बात को 'बेतुका और निराधार' बताते हुए उसको कड़ी फटकार भी लगाई थी। कनाडा में भारत के बाहर सबसे बड़ा सिख समुदाय रहता है। इनमें 'खालिस्तान' मूवमेंट से जुड़े अलगाववादी भी शामिल हैं। ये एक छोटा सा अलगाववादी ग्रुप है।
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