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रिटायर्ड टेनिस खिलाड़ी विजय अमृतराज ने कहा, भारत को खेलों में अधिक निवेश करने की जरूरत 

पूर्व टेनिस खिलाड़ी और यूएन गुडविल एंबेसडर विजय अमृतराज ने ‘न्यू इंडिया अब्रॉड’ को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि भारत को खेलों में निवेश बढ़ाने की जरूरत है। अबू धाबी में इंडियास्पोरा फोरम के दौरान उन्होंने खेलों में निवेश की चुनौतियों और भारत के खेल विकास के बारे में खुलकर बात की।

भारत की खेल प्रगति पर बात करते हुए अमृतराज ने काफी सुधारों को माना। उन्होंने कहा, ज्यादा बच्चे खेलों को जीवनशैली और पेशे के तौर पर अपना रहे हैं। / Courtesy Photo

अबू धाबी में इंडियास्पोरा फॉर गुड 2025 के मौके पर विजय अमृतराज ने खेलों में निवेश बढ़ाने और भारत के खेल विकास पर अपनी बात रखी। विजय अमृतराज रिटायर्ड प्रोफेशन टेनिस खिलाड़ी, कमेंटेटर और यूएन गुडविल एंबेसडर हैं। 'न्यू इंडिया अब्रॉड' से बातचीत में चेन्नई के रहने वाले अमृतराज ने कहा कि खेलों में निवेश जुटाना मुश्किल है। इसकी वजह ये है कि रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, 'ROI (Return on Investment) का अनुमान लगाना बहुत मुश्किल है।'

उन्होंने आगे कहा, 'खेलों में, मुझे लगता है कि कॉरपोरेट स्पॉन्सरशिप से खिलाड़ियों को सपोर्ट करना बहुत जरूरी है जिससे वो हमें अगले लेवल पर ले जा सकें। लेकिन कोई गारंटी नहीं है। यही वजह है कि खेलों में इतिहास, विश्लेषण, रिसर्च और डेटा टेक्नोलॉजी, सॉफ्टवेयर या दवाइयों के बिजनेस की तरह जरूरी नहीं काम करे।'

पारंपरिक कारोबार से उलट, जहां प्लानिंग से ग्रोथ तय होती है, खेलों में लंबे समय तक निवेश करना पड़ता है, सक्सेस की कोई गारंटी नहीं होती। अमृतराज ने कहा, 'आपको इसमें बहुत पैसा लगाना पड़ता है, बिना किसी गारंटी के, बिना किसी भरोसे के, बिना ROI के। उम्मीद है, एक या दो सफल होंगे। यही रिस्क है और इसी पर हमें ध्यान केंद्रित करना होगा।'

भारत की खेल प्रगति पर बात करते हुए अमृतराज ने काफी सुधारों को माना। उन्होंने कहा, 'मेरे 40 साल पहले खेलने के समय से अब बहुत सुधार हुआ है। ज्यादा बच्चे खेलों को जीवनशैली और पेशे के तौर पर अपना रहे हैं। उन्हें लगने लगा है कि स्टार्टअप की तरह आपको डॉक्टर, वकील या इंजीनियर ही नहीं बनना है। आप खेलों को भी अपना सकते हैं और देख सकते हैं कि आप कितनी दूर जा सकते हैं।'

उन्होंने बताया कि भारतीय-अमेरिकी, खासकर टेनिस और गोल्फ में, कमाल का प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'यह सबको सिर्फ उम्मीद ही नहीं, बल्कि विश्वास भी दिलाता है कि इन बच्चों को फॉलो किया जा सकता है।' क्रिकेट के बारे में उन्होंने कहा कि यह संस्कृति में गहराई से समाया हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रीय टीम में कई दक्षिण एशियाई खिलाड़ी हैं। उन्होंने कहा, 'यह खेलों में अर्थव्यवस्था का चालक है।' उन्होंने इस चिंता को खारिज कर दिया कि क्रिकेट ने दूसरे खेलों को पीछे छोड़ दिया है।

अमृतराज ने ओलंपिक की मेजबानी की भारत की महत्वाकांक्षाओं पर भी बात की। उन्होंने कहा, 'यह सोचने लायक बात है। जब हम कुछ करते हैं, तो हम उसे बहुत अच्छे से करते हैं। दुनिया का कोई भी देश हमारी मेहमाननवाजी, संस्कृति और उस 'वाह' फैक्टर से मुकाबला नहीं कर सकता जो भारत देता है।' हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि सफलता सिर्फ मेजबानी तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'जरूरी बात यह है कि हमें मेडल काउंट में टॉप थ्री या टॉप फाइव में आना चाहिए। हमें निवेश करना होगा, निवेश करना होगा, निवेश करना होगा। सिर्फ आर्थिक रूप से ही नहीं, बल्कि उन बच्चों में भी जो देश के लिए खेलों को अपना जीवन समर्पित करने को तैयार हैं।' 

भारतीय-अमेरिकी खेलों में क्यों नहीं छा रहे हैं?

राजनीति, विज्ञान और व्यापार में कामयाबी के बावजूद, खेलों में भारतीय-अमेरिकियों की मौजूदगी सीमित है। अमृतराज ने इसे जरूरी मेहनत और जोखिम से जोड़ा। उन्होंने समझाया, 'खेलों में एक ऐसा जोखिम है जो किसी और बिजनेस में नहीं होता। आप इसमें बहुत लंबे समय तक हो सकते हैं और फिर भी वर्ल्ड टूर के करीब भी नहीं पहुंच पाएं। यह शायद सबसे अधिक जोखिम भरा स्टार्टअप है।'

खेलों के अलावा, अमृतराज ने अपने परिवार के साथ मनोरंजन उद्योग में भी कदम रखा है। उन्होंने कहा, 'यह कुछ ऐसा है जिसका हम आनंद लेते हैं – फिल्में, टेलीविजन, छोटी डॉक्यूमेंट्री और पोस्ट-प्रोडक्शन।' हॉलीवुड में भारतीय अभिनेताओं की कमी पर उन्होंने कहा कि सफलता के लिए नीचे से शुरुआत करना जरूरी है। उन्होंने कहा, 'जब आप कहीं जाते हैं, तो आपको नीचे से शुरुआत करनी होती है, सीखना होता है। स्टार बनने के लिए ऊपर तक काम करना होता है।'

हालांकि, उन्होंने कहा कि भारतीय-अमेरिकी तरक्की कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'ज्यादा लोग इसमें फुल-टाइम जुड़ रहे हैं। विविधता ने इसमें मदद की है। मेरी सलाह? बस कर दो। गिर जाओ और फिर से कोशिश करो। इसी तरह सफलता मिलती है, खासकर विदेश में।'

पांच दशकों से ज्यादा समय तक लॉस एंजिल्स में रहने के बाद अमृतराज ने भारतीय डायस्पोरा के बढ़ते प्रभाव को देखा है। उन्होंने कहा, 'हमने प्रवासियों के तौर पर बहुत बड़ी तरक्की की है। अमेरिका में लगभग 4 मिलियन गैर-निवासी भारतीयों के साथ हम सबसे अमीर जातीय अल्पसंख्यक बन गए हैं। यह एक अनोखी उपलब्धि है।'

इंडियास्पोरा के कामों की तारीफ करते हुए उन्होंने दुनिया भर के भारतीय नेताओं को एक साथ लाने वाले इस फोरम की सराहना की। उन्होंने कहा, 'जिंदगी के अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों को एक जगह लाना सबसे मुश्किल कामों में से एक है, लेकिन इंडियास्पोरा ने शानदार काम किया है। मिलकर, हम भारत और दुनिया भर के भारतीयों को तेजी से आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं।'

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