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राजनयिक विवाद के बीच भारत ने कनाडा के 'विरोधाभासी' रवैये पर उठाए सवाल, बताई वजह

प्रवक्ता ने कहा कि हमारे अनुरोधों के बावजूद कनाडा ने उस गिरोह के सदस्यों पर कोई कार्रवाई नहीं की है, जिस पर कनाडाई पुलिस ने सिख अलगाववादी की हत्या में भारतीय एजेंटों से जुड़े होने का आरोप लगाया है।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल / screengrab from X @MEAIndia

कनाडा के साथ गहराए राजनयिक विवाद के बीच भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कनाडाई प्रशासन के कथित विरोधाभासी रवैये पर सवाल उठाए और उसे अजीब करार दिया। 

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमारे अनुरोधों के बावजूद कनाडा ने उस गिरोह के सदस्यों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है, जिस पर कनाडाई पुलिस ने 2023 में सिख अलगाववादी नेता की हत्या में भारत सरकार के एजेंटों से जुड़े होने का आरोप लगाया है और जिसकी वजह से संबंधों में दरार आई है।

प्रवक्ता ने इसे 'अजीब' बताते हुए कहा कि यह रवैये में विरोधाभास है, जिसे हम समझ नहीं पा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि कनाडा के पास पिछले एक दशक या उससे अधिक समय से भारत के प्रत्यर्पण संबंधी 26 अनुरोध लंबित हैं जिनमें लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के सदस्य भी शामिल हैं।

वीकली प्रेस कॉन्फ्रेंस में जायसवाल ने कहा कि हमने गिरोह के सदस्यों के बारे में कनाडाई सरकार के साथ सुरक्षा संबंधी जानकारियां साझा की है। इनमें लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के सदस्य भी शामिल हैं और कनाडा से उन्हें गिरफ्तार करने या उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। हालांकि कनाडा ने कोई कार्रवाई नहीं की है। यह 'बहुत गंभीर' बात है।

जायसवाल ने कहा कि हमें यह वास्तव में अजीब लगता है। आरसीएमपी एक तरफ इन लोगों द्वारा किए गए अपराधों के लिए भारत को दोषी ठहरा रहा है, वहीं जब हम उन्हें निर्वासित करने के लिए कह रहे हैं तो उन पर कार्रवाई नहीं कर रहा है। 

बता दें कि रॉयल कनाडियन माउंटेड पुलिस ने वैंकूवर के पास हरदीप सिंह निज्जर की हत्या मामले में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े होने का आरोप भारत सरकार के एजेंटों पर लगाया है। इसी मसले को लेकर कनाडा और भारत ने एकदूसरे के राजनयिकों को निष्कासित कर दिया है। 

इस बीच कनाडा के प्रधानामंत्री जस्टिन ट्रूडो ने जांच आयोग के समक्ष गवाही में स्वीकार किया है कि उन्हें खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय सरकार के एजेंटों के शामिल होने के बारे में केवल खुफिया जानकारी थी, उनके पास कोई ठोस सबूत नहीं था। भारत की ओर से सबूतों की मांग पर कुछ भी 'ठोस' पेश नहीं किया गया।

इसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ट्रूडो की गवाही का जिक्र करते हुए कहा कि हमने जो कुछ सुना, वह केवल उसी बात की पुष्टि करता है जो हम लगातार कहते आ रहे हैं कि कनाडा ने भारत और भारतीय राजनयिकों के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों के समर्थन में हमें कोई भी सबूत पेश नहीं किया है। प्रवक्ता ने ये भी कहा कि इस दुर्व्यवहार से भारत-कनाडा संबंधों को जो नुकसान हुआ है, उसकी जिम्मेदारी केवल प्रधानमंत्री ट्रूडो की है। 

भारत एक तरफ कनाडा द्वारा लगाए गए सभी आरोपों से इनकार कर रहा है, वहीं ऐसे ही मसले पर वह अमेरिका के साथ काम कर रहा है। अमेरिका ने पिछले साल आरोप लगाया था कि एक भारतीय अधिकारी न्यूयॉर्क में एक अन्य सिख अलगाववादी नेता की हत्या की असफल साजिश में शामिल था।

जायसवाल ने गुरुवार को दावा किया कि इस मामले में अमेरिका द्वारा नामित अधिकारी भारत सरकार द्वारा नियोजित नहीं था। मामले की जांच कर रही भारत सरकार की समिति के सदस्यों से अमेरिका यात्रा के दौरान मुलाकात के बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि हम हत्या की नाकाम साजिश की जांच में भारत द्वारा किए जा रहे सहयोग से संतुष्ट हैं।
 



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