प्रख्यात हिंदू धर्मगुरु राजन जेड ने 30 जुलाई को दूसरी बार वाशिंगटन, डीसी में संयुक्त राज्य अमेरिका सीनेट में प्रारंभिक प्रार्थनाएं पढ़ीं। राजन 44 अमेरिकी राज्यों और कनाडा में विधायी निकायों में रेकॉर्ड 312 हिंदू आह्वान पढ़ चुके हैं। यूनिवर्सल सोसाइटी ऑफ हिंदूइज्म के अध्यक्ष राजन जेड ने 12 जुलाई, 2007 को वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी सीनेट में आह्वान (उद्घाटन-प्रार्थना) पढ़ी थीं। हालांकि उस वक्त ईसाई प्रदर्शनकारियों ने इसका विरोध किया था और इसे बाधित किया गया था। लेकिन वह ऐतिहासिक क्षण था।
इस बार केसरिया वस्त्र, रुद्राक्ष की माला और माथे पर तिलक लगाए हुए राजन जेड ने मानवता के लिए एक गहरा संदेश दिया। वैदिक शास्त्रों के श्लोकों का अंग्रेजी में अनुवाद किया। उनके प्रार्थना का सार था, 'हम उस सर्वोच्च सत्ता की दिव्य महिमा पर ध्यान करते हैं जो पृथ्वी के हृदय में, आकाश के जीवन में, स्वर्ग की आत्मा में है। वह हमारे मन को प्रेरित और प्रकाशित करे। हमें असत्य से सत्य तक, अंधकार से प्रकाश की ओर और मृत्यु से अमरता की ओर ले जाए। आइए हम दुनिया के कल्याण की सेवा करने का प्रयास करें। निःस्वार्थ के प्रति भक्ति से मनुष्य जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य प्राप्त करता है।' इस प्रार्थना को आधिकारिक कांग्रेस चैनल सी-स्पैन द्वारा रिकॉर्ड किया गया है।
नेवादा की सीनेटर कैथरीन कॉर्टेज मास्टो ने अपने भाषण में राजन जेड के महत्वपूर्ण योगदानों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, 'जेड नेवादा में हिंदू समुदाय के धार्मिक नेता हैं। वह नेवादा इंटरफेथ एसोसिएशन के एक सक्रिय सदस्य हैं।'
एक वैश्विक हिंदू और अंतरधार्मिक नेता के तौर पर जेड को विश्व अंतरधार्मिक नेता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। जेड द इंटरफेथ पीस प्रोजेक्ट के सलाहकार बोर्ड में हैं। वे 'ऑन फेथ' के लिए पैनलिस्ट रहे हैं, जो धर्म पर एक प्रतिष्ठित इंटरैक्टिव बातचीत है। इसे द वाशिंगटन पोस्ट द्वारा निर्मित किया गया था। 13 साल से अधिक समय से गैनट प्रकाशन में एक साप्ताहिक बहु-धार्मिक पैनल 'फेथ फोरम' का निर्माण करते हैं।
अमेरिकी सीनेट और अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के अलावा राजन ने 44 अमेरिकी राज्यों और कनाडा में 310 अन्य विधायी निकायों में हिंदू उद्घाटन-प्रार्थनाएं पढ़ी हैं। इनमें राज्य सीनेट, राज्य सदन-प्रतिनिधि / विधानसभाएँ, काउंटी आयोग, शहर / कस्बों की परिषदें शामिल हैं। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इनमें से अधिकांश इन विधायी निकायों की पहली हिंदू प्रार्थनाएं थीं। हिंदू धर्म, दुनिया का सबसे पुराना और तीसरा सबसे बड़ा धर्म है। इसके लगभग 1.2 बिलियन अनुयायी हैं और मोक्ष (मुक्ति) इसका अंतिम लक्ष्य है। अमेरिका में लगभग तीन मिलियन हिंदू हैं।
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