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बिहार से Marriott तक, रंजू एलेक्स की जेंडर बायस से लड़कर कामयाबी की कहानी

Marriott इंटरनेशनल की रीजनल वाइस प्रेसिडेंट रंजू एलेक्स ने अपने संघर्षों और कामयाबी की कहानी शेयर करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने समाज में महिलाओं को लेकर पूर्वाग्रहों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। अपनी प्रेरणादायक यात्रा के जरिए उन्होंने न सिर्फ खुद कामयाबी हासिल की, बल्कि दूसरों को भी प्रेरित किया।

द पॉवर ऑफ शी' पॉडकास्ट में रंजू एलेक्स। / USISPF

Marriott इंटरनेशनल की रीजनल वाइस प्रेसिडेंट रंजू एलेक्स ने हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में मुश्किलों से लड़ने और लड़की-लड़के के फर्क को मिटाने की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने अपनी जिंदगी के उतार-चढ़ाव और समाज की रुकावटों को पार करने की अपनी कहानी भी शेयर की।

रंजू ने यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) के अक्षोभ गिरिधरदास से 'द पॉवर ऑफ शी' पॉडकास्ट में बात करते हुए बताया, 'अब होटलों में काम करने वाली महिलाओं की तादाद बढ़ रही है। हालांकि, अभी बहुत लंबा रास्ता तय करना है। इंडस्ट्री में औसतन सिर्फ 19 से 20 फीसदी महिलाएं ही हैं, जो कि बहुत कम है।'

मूल रूप से भारत के बिहार राज्य से ताल्लुक रखने वाली एलेक्स ने याद किया कि कैसे उन्हें एक महिला के तौर पर होटल इंडस्ट्री में आने में कितनी मुश्किलें उठानी पड़ीं। ये इंडस्ट्री, खासकर कंजर्वेटिव समाजों में, औरतों के लिए मुनासिब नहीं मानी जाती। उन्होंने बताया, 'औरतों के इस इंडस्ट्री में आने को लेकर बहुत बड़ा टैबू था। 'खासकर बिहार जैसे राज्यों में अच्छे परिवार की अच्छी लड़कियां होटलों में काम नहीं करतीं', ऐसा माहौल था।'

उन्होंने याद करते हुए कहा, 'जिस कम्युनिटी से मैं ताल्लुक रखती हूं, वहां महिलाएं इतना काम नहीं करती थीं। और अगर करती भी थीं, तो होटल तो बिलकुल नहीं। जब मैंने इस इंडस्ट्री में आने का फैसला किया तो घर में बहुत हंगामा हुआ। मेरे पापा ने मेरे लिए बहुत लड़ाई लड़ी। यही पहला मौका था जब मैंने खुद अपनी जिंदगी के फैसले लिए। यहीं से मैंने अपनी पहली 'ग्लास सीलिंग' तोड़ी।

हॉस्पिटैलिटी  इंडस्ट्री में महिलाओं के सामने आने वाली बड़ी चुनौतियों पर बात करते हुए एलेक्स ने मिडिल मैनेजमेंट लेवल पर औरतों के काम छोड़ देने की ऊंची दर की तरफ इशारा किया।

उन्होंने कहा, 'जहां हम पिछड़ जाते हैं, वो है मिडिल मैनेजमेंट। क्योंकि एक लड़की बड़ी होती है, शादी करती है, बच्चे पैदा करती है। यहीं पर बच्चों या परिवार की देखभाल करने का लालच, एक तो बहुत सी महिलाएं खुद ही काम छोड़ देती हैं। दूसरा, अगर वो छोड़ती नहीं हैं तो परिवार का बहुत दबाव होता है कि वो काम छोड़ दें।'

अपनी कॉरपोरेट भूमिका से अलग, एलेक्स डाइवर्सिटी, इंक्लूजन और मेंटरशिप की पैरोकार भी रही हैं। उन्होंने आगे कहा, 'लड़कों का साथ देना लैंगिक समानता में बहुत अहम भूमिका निभाता है। ये एक ऐसा माहौल बनाने के बारे में है जहां महिलाएं खुद को सपोर्टेड और एम्पावर्ड महसूस करें।' उन्होंने कहा, 'हम औरतों की जिम्मेदारी है कि हम अपनी कहानियां शेयर करें, ताकि और भी महिलाएं प्रेरित हों और उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिले।'

USISPF अमेजरिका और भारत के बीच आर्थिक और सामरिक रिश्ते मजबूत करने का काम करता है। संस्था ने 'द पॉवर ऑफ शी' को एक ऐसे प्लेटफॉर्म के तौर पर पेश किया है जहां कैरियर में तरक्की, वर्कप्लेस में इंक्लून और प्रोफेशनल चुनौतियों जैसे विषयों पर महिला लीडर्स से बात की जाती है। इस पॉडकास्ट में आगे भी इंडस्ट्रीज की लीडर्स से बातचीत होगी। 

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