कनाडा में हिंदू मंदिर में हिंसा के मामले में अधिकारियों ने तीन लोगों को आरोपित किया है। हमले को लेकर भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीखी प्रतिक्रिया के बाद ये कदम उठाया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टोरंटो के पास ब्रैम्पटन शहर में हिंदू सभा मंदिर के बाहर रविवार को हिंदुओं पर जानबूझकर हमला करने का आरोप लगाते हुए घटना की कड़ी निंदा की थी। उन्होंने कहा था कि हिंसा के ऐसे कृत्यों से भारत का संकल्प कमजोर नहीं होगा। हम कनाडा सरकार से न्याय सुनिश्चित करने और कानून का शासन कायम रखने की उम्मीद करते हैं। कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो ने भी हिंसा की निंदा की है।
हमले के वीडियो में मंदिर के अंदर तिरंगा थामे लोगों पर खालिस्तानी झंडा लेकर आए सिखों को हमला करते देखा जा सकता है। उन्होंने लाठी डंडों से लोगों को पीटा था और हाथापाई की थी। कुछ पुलिसकर्मियों पर भी हिंदुओं के ऊपर हमला करने का आरोप है।
पील क्षेत्रीय पुलिस ने घटना के बाद कहा है कि पूजा स्थल पर विरोध प्रदर्शन के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है और उन पर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें हथियारों से हमला करना और एक पुलिस अधिकारी पर हमला करना शामिल है।
इस घटना ने भारत और कनाडा के बीच गहराए राजनयिक विवाद को और तूल दे दिया है। दोनों देशों के संबध तभी से खराब चल रहे हैं, जब कनाडा ने भारत सरकार पर 2023 में वैंकूवर में खालिस्तान एक्टिविस्ट हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया।
पीएम ट्रूडो ने मोदी सरकार पर कनाडा की संप्रभुता का उल्लंघन करने और कनाडा की धरती पर सिख कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने का व्यापक अभियान चलाने का आरोप लगाया है। हालांकि भारत आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है और ओटावा पर धार्मिक चरमपंथियों को शरण देने का आरोप लगाता रहा है।
कनाडियन हिंदू फाउंडेशन के अध्यक्ष अरुणेश गिरि का कहना है कि इस घटना की वजह से पूरे समुदाय में डर फैल गया है। कनाडा में हिंदू समुदाय को लग रहा है कि उन्हें सुरक्षित तरीके से पूजा करने का अधिकार भी नहीं दिया जा रहा है। संगठन ने हमले के विरोध में कई जगहों पर रैलियों का भी आह्वान किया है।
इस बीच, कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका (CoHNA) के आह्वान पर ब्रैम्पटन में बड़ी संख्या में हिंदुओं ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया। इस दौरान कनाडा सरकार से हिंदूफोबिया से निपटने और मंदिरों व हिंदुओं पर हमले रोकने की मांग की गई।
हालांकि खालिस्तान समर्थक समूह सिख फॉर जस्टिस का दावा है कि उनके सदस्य भारतीय वाणिज्य दूतावास के अधिकारियों की मौजूदगी के खिलाफ हिंदू मंदिर के बाहर शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे।
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि मंदिर पर हमला चरमपंथियों और अलगाववादियों द्वारा किया गया था और हम कनाडा से यह सुनिश्चित करने की मांग करते हैं कि सभी पूजा स्थलों की रक्षा की जाए। हमें उम्मीद है कि हिंसा में शामिल लोगों पर मुकदमा चलाया जाएगा। हम कनाडा में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित हैं।
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